भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में भर्ती एक मरीज को अपनी आंख गवानी पड़ी सरकार अब ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल में अलग से वार्ड बना रही है।
कोरोना का इलाज करा चुके मरीजों में अब ब्लैक फंगस इनफेक्शन अटैक कर रहा है राजधानी सहित प्रदेश के कई जिलों में ब्लैक फंगस के मरीजों का आंकड़ा अब बढ़ने लगा है भोपाल में अगले 1 दिन में 8 से लेकर 10 मरीज सामने आए हैं राजधानी के हमीदिया हॉस्पिटल में आज दमोह के एक मरीज को भर्ती किया गया है
ऑक्सीजन सपोर्ट और स्टेरॉयड के बाद अटैक .....✓ऑक्सीजन देने के बाद मरीजों को नाक के साइनस में ब्लैक फंगस की शिकायत मिल रही है हालांकि इसको एंडोस्कोपी की मदद से हटा दिया जाता है लेकिन जरूरी है
कि समय रहते ब्लैक फंगस की पहचान कर मरीज को इलाज मुहैया कराया जाए
अस्पताल में आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर ललित श्रीवास्तव के मुताबिक फंगस से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी रखने की जरूरत है
कैंसर और डायबिटीज के मरीजों पर इसके अटैक का ज्यादा खतरा है
संक्रमण के ब्रेन में पहुंचने पर यह घातक साबित हो जाता है ऐसे में जरूरी है कि इसकी समय पर पहचान कर इलाज किया जाए फिलहाल इस तरह के मरीजों की संख्या कम है लेकिन आने वाले समय में इसके संक्रमण की दर बढती जा रही है।
अस्पतालों में बनेगा अलग से वार्ड, ब्लैक फंगस के केस मिलने के बाद राजधानी के अस्पताल में ऐसे मरीजों के लिए एक अलग से वार्ड बनाने की तैयारी शुरू हो गई है 20 बैड्स का अलग से वार्ड बनाया जा रहा है वार्ड में आईएमटी न्यूरोलॉजी, नेत्र रोग ,टेस्टिंग डिपार्टमेंट के डॉक्टरों की टीम इलाज करेगी। साथ ही
अब ब्लैक फंगस इंफेक्शन के इलाज में कारगर साबित होने वाले इंजेक्शन खरीदने की भी तैयारी शुरू हो गई है।
इजेक्शन की कीमत ₹5000 बताया जा रही है इस इ की भी भारी कमी है। एक इंजेक्शन की कीमत तकरीबन 5000 है वही रैम डेसिविर की तरह इसके लिए भी किल्लत व कालाबाजारी ना शुरू हो जाए
इसलिए सरकार अब इस इंजेक्शन के लिए नई रणनीति बना रही है
प्रदेश के शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा फंगल इंफेक्शन पर रिसर्च की जा रही है अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयों का स्टॉक करने के लिए निर्देश दिए गए हैं हर एक मरीज को इलाज मुहैया कराया जाएगा।
ओवरडोज का असर जबलपुर और इंदौर में ब्लैक फंगल इंफेक्शन के मरीजों के आंकड़े अब सामने आने लगे हैं बताया जा रहा है कोरोना से पीड़ित होने के बाद स्टेरॉइड के ओवरडोज के कारण भी यह संक्रमण अटैक करता है डॉक्टर की सलाह है
कि इस तरह की बीमारियों में बार-बार स्टीम लेना भी ठीक नहीं है और मरीज ऐतिहासिक बरतने की जरूरत है
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